-एसटीपी न चलाने, बिना ट्रीट के सीवरेज को डिस्चार्ज करने व भूजल दोहन पर हुई कार्रवाई
-जुर्माने की रकम 7 दिन में जमा करने का निर्देश

द न्‍यूज गली, ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा लगातार दिए जा रहे निर्देशों के बाद भी अजनारा होम्‍स बिल्‍डर प्रबंधन के द्वारा नियमों का खुलेआम उल्‍लंघन किया जा रहा था। मामले में कार्रवाई करते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-16बी स्थित अजनारा होम्स (एपीवाई रियल्टी) पर एसटीपी न चलाने, सीवरेज को शोधित किए बिना डिस्चार्ज करने व उद्यान से जुड़े कार्यों के लिए भूजल दोहन करने पर 50 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है। साथ ही सोसाइटी से निकलने वाले कचरे का उचित प्रबंधन न करने पर भी 4.32 लाख रुपए की पेनल्टी लगाई है। बिल्डर पर एफआईआर दर्ज करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से पुलिस को पत्र भी लिखा गया है।

जारी किया था नोटिस
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर सीवर विभाग की टीम ने 202 बिल्डर सोसाइटियों को नोटिस जारी किया गया। जिसमें ग्रेटर नोएडा व ग्रेनो वेस्ट की सोसाइटियों से एसटीपी की समुचित क्षमता और सुचारु संचालन पर जवाब मांगा गया है। साथ ही शोधित सीवेज पानी का इस्तेमाल पेड़-पौधों  की सिंचाई के लिए उपयोग कर रहे हैं या नहीं, इस पर भी जवाब मांगा गया। जवाब न मिलने पर सीवर विभाग की टीम मौके पर जाकर मुआयना करती है और पेनल्टी भी लगाती है। अजनारा होम्स पर कार्रवाई भी इसी अभियान के तहत की  गई है। सीवरेज विभाग की तरफ से बिल्डर को पत्र भेजकर एसटीपी की स्थापित क्षमता और संचालन की स्थिति, सोसाइटी में रहने वाली कुल आबादी, शोधित सीवरेज के रियूज आदि की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन बिल्डर की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई। जिसके चलते निवासियों की शिकायत पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीवर विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक सन्नी यादव के नेतृत्व में टीम ने हाल ही में सोसाइटी का विजिट किया। इस दौरान एसटीपी पूर्णतया बंद पाया गया। निवासियों ने बताया कि विगत दो वर्षों से एसटीपी बंद है। सोसाइटी में लगभग 2300 फ्लैट हैं, जिससे रोजाना औसतन लगभग 1.15 एमएलडी सीवेज निकलने का आकलन है। इस अशोधित सीवेज को नाली में गिराया जा रहा था। नाली की तरफ की लाइन चोक होने पर सीवेज को बेसमेंट में भी गिराया जाने लगा, जिसकी वजह से निवासियों के लिए गंभीर संकट की स्थिति बन गई थी। यह एनजीटी के आदेशों और सीपीसीबी व यूपीपीसीबी के नियमों के भी खिलाफ है।