द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा: करीब तीन माह से उत्तर प्रदेश भू संपदा विनियामक प्राधिकरण रेरा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यीडा के बीच अटकी 973 आवासीय प्लॉटों की योजना का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। यीडा ने रेरा की शर्तों को स्वीकार कर लिया है। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होते ही इसी माह योजना लॉन्च होने की उम्मीद है। नोएडा एयरपोर्ट के पास यह योजना लांच की जाएगी। नए वर्ष में प्रस्तावित इस आवासीय योजना के लिए यीडा ने रेरा में पंजीकरण आवेदन किया था लेकिन दो प्रमुख आपत्तियों के कारण मामला लंबित हो गया। रेरा ने प्लॉट की कीमत के एकमुश्त भुगतान और एग्रीमेंट टू लीज की शर्त को लेकर आपत्ति जताई थी। एकमुश्त भुगतान पर पहले ही सहमति बन चुकी थीए लेकिन लीज प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद बना हुआ था। रेरा का पक्ष था कि बिल्डर परियोजनाओं की तर्ज पर प्लॉट आवंटन के बाद एग्रीमेंट टू लीज लागू किया जाए जबकि यीडा का तर्क था कि परंपरागत रूप से कब्जा देते समय सीधे लीज डीड की जाती है जिससे आवंटियों और प्राधिकरण दोनों को सुविधा रहती है। प्राधिकरण बोर्ड ने अंततः रेरा की शर्त स्वीकार करते हुए प्लॉट आवंटन के बाद एग्रीमेंट टू लीज लागू करने के निर्देश दिए। इसके बाद यीडा ने रेरा की आपत्तियों का निस्तारण कर दिया। एसीईओ शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि सभी आपत्तियां दूर कर दी गई हैं और पंजीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही योजना को औपचारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा।
सेक्टर 15 सी में पहली बार प्लॉट आवंटन
योजना के तहत पहली बार सेक्टर.15 सी में आवासीय प्लॉटों का आवंटन किया जाएगा। इसके अलावा सेक्टर.18 और 24ए में भी प्लॉट उपलब्ध होंगे। कुल 973 प्लॉटों में से 755 प्लॉट सामान्य श्रेणी के हैं। प्लॉटों का आकार 162 वर्गमीटर से 290 वर्गमीटर तक निर्धारित किया गया है। योजना में 200 वर्गमीटर श्रेणी के 481 और 162 वर्गमीटर श्रेणी के 476 प्लॉट शामिल हैं जिनकी मांग अधिक रहने की संभावना है।
आवंटियों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ
यीडा की शर्तों के अनुसार आवेदन के समय प्लॉट की कुल कीमत का 10 प्रतिशत पंजीकरण शुल्क के रूप में जमा करना होगा। आवंटन होने के बाद शेष 90 प्रतिशत राशि 60 दिनों के भीतर एकमुश्त जमा करनी होगी। अब एग्रीमेंट टू लीज लागू होने से आवंटियों को एकमुश्त भुगतान के साथ स्टांप शुल्क भी देना होगा जिससे उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। हालांकि रेरा का मानना है कि इस प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और आवंटियों के हित सुरक्षित रहेंगे।
