द न्यूज गली, नई दिल्ली : सिंगुर से वर्चुअल माध्यम से आयोजित एक कार्यक्रम में अधिकारियों ने कहा कि अंतर्गत आने वाले संस्थान, जिनमें भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) भी शामिल है, उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों और प्रशिक्षण ढांचों को पुनर्संरेखित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य भारत की ब्लू इकॉनमी की आकांक्षाओं को मजबूती देना और विस्तारित अंतर्देशीय जल परिवहन नेटवर्क के लिए भविष्य-सक्षम मानव संसाधन तैयार करना है।

अधिकारियों के अनुसार, ये बुनियादी ढांचा परियोजनाएं केवल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये देश के युवाओं के लिए समुद्री शिक्षा, कौशल विकास और करियर के नए अवसर भी सृजित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अवसंरचना विकास और मानव पूंजी निर्माण का समन्वय दीर्घकालिक क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।

सिंगुर से वर्चुअल रूप से किया गया यह उद्घाटन भारत सरकार के समुद्री विकास के प्रति एकीकृत और भविष्य-दृष्टि वाले दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस पहल में आधुनिक अवसंरचना का विकास, हरित गतिशीलता को बढ़ावा और कौशल पारिस्थितिकी तंत्र का सुदृढ़ीकरण शामिल है।

इन सभी प्रयासों से पश्चिम बंगाल की व्यापार और कनेक्टिविटी के एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में भूमिका और अधिक मजबूत होगी। साथ ही, भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के एक प्रमुख चालक के रूप में उभरेंगे।