-छोटा सा लालच जिंदगी की मेहनत पर फेर सकता है पानी
-साइबर क्राइम एक्सपर्ट प्रोफेसर आरबी सिंह ने बताया बचाव का उपाय
द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा: साइबर क्राइम के अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं, आज का युग डिजिटल युग कहलाता है। इंटरनेट, मोबाइल फोन, ऑनलाइन बैंकिंग और सोशल मीडिया ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन जहाँ एक ओर तकनीक ने सुविधा दी है, वहीं दूसरी ओर साइबर क्राइम जैसी गंभीर समस्या को भी जन्म दिया है। ऐसे में साइबर अपराध तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, जो समाज, अर्थव्यवस्था और व्यक्तिगत जीवन के लिए एक बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
साइबर क्राइम का अर्थ है कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट या किसी भी डिजिटल माध्यम का उपयोग करके किया गया अपराध। इसके अंतर्गत ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया अकाउंट हैक करना, फेक लिंक भेजकर पैसे ठगना, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसे अपराध शामिल हैं। आए दिन समाचार पत्रों में ऐसे मामलों की खबरें पढ़ने को मिलती हैं, जिनमें लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं। साइबर अपराध बढ़ने का सबसे बड़ा कारण लोगों में डिजिटल जागरूकता की कमी है। बहुत से लोग अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं, अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे ओटीपी, पासवर्ड और बैंक विवरण दूसरों के साथ साझा कर देते हैं। अपराधी इसी लापरवाही का फायदा उठाकर लोगों को ठग लेते हैं। इसके अलावा, इंटरनेट का बढ़ता उपयोग और सस्ती स्मार्टफोन सुविधाएँ भी साइबर अपराध को बढ़ावा दे रही हैं। साइबर क्राइम को रोकने के लिए सरकार द्वारा साइबर कानून बनाए गए हैं और साइबर पुलिस थानों की स्थापना भी की गई है। लेकिन कानून के साथ-साथ जन जागरूकता सबसे ज़रूरी है। लोगों को सुरक्षित पासवर्ड का उपयोग करना चाहिए, अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा नहीं करना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करनी चाहिए।
साइबर अपराध से कैसे बचें
साइबर विशेषज्ञ प्रोफेसर आरबी सिंह का कहना है कि सबसे पहले, किसी भी अनजान कॉल, मैसेज, ई-मेल या वीडियो पर तुरंत भरोसा न करें। चाहे आवाज़ कितनी ही असली क्यों न लगे, पैसे भेजने या जानकारी देने से पहले सत्यापन ज़रूर करें। बैंक, पुलिस या कोई सरकारी संस्था कभी भी फोन पर ओटीपी, पासवर्ड या एटीएम नंबर नहीं मांगती। दूसरा, सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी जैसे मोबाइल नंबर, पता, स्कूल या कार्यस्थल की जानकारी साझा करने से बचें। AI अपराधी इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल करके लोगों को फँसाते हैं। मजबूत पासवर्ड रखें और समय-समय पर उसे बदलते रहें। तीसरा, किसी भी संदिग्ध लिंक, इनाम, लॉटरी या नौकरी के ऑफर पर क्लिक न करें। ऐसे लिंक अक्सर ठगी का जरिया होते हैं। मोबाइल और कंप्यूटर में सुरक्षा अपडेट और एंटी-वायरस का उपयोग करें। यदि कोई साइबर अपराध होता है, तो डरें नहीं। तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नज़दीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत करें। समय पर की गई शिकायत से नुकसान को रोका जा सकता है।

