-वन्य जीवन संरक्षण के कानूनी ढांचे पर लोगों ने व्यक्त किया विचार
-सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से जुटे वक्ता
द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा: नॉलेज पार्क स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय हाइब्रिड अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसका विषय घरेलू जानवरों और वन्य जीवन संरक्षण के कानूनी ढांचे और नीतियों की अवधारणा: मुद्दे और चुनौतियाँ था। सम्मेलन में घरेलू जानवरों के कल्याण और वन्य जीवन संरक्षण से जुड़े कानूनी, नैतिक और नीति-आधारित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चाओं में विधायी अंतराल, प्रवर्तन संबंधी चुनौतियाँ तथा पशु अधिकारों और जैव विविधता संरक्षण हेतु प्रभावी कानूनों की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने पशु क्रूरता, वन्य जीवन अपराध, आवासीय क्षरण, जलवायु परिवर्तन और मानव-पशु संघर्ष जैसी उभरती चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए मजबूत और संवेदनशील कानूनी ढाँचों की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रसन्ना भालचंद्र वराले ने कहा कि घरेलू जानवरों और वन्य जीवन की सुरक्षा हमारे संवैधानिक मूल्यों, पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ऐसे अकादमिक मंच नीति-उन्मुख और व्यावहारिक समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सामाजिक जिम्मेदारी
प्रो-चांसलर, शारदा यूनिवर्सिटी वाईके गुप्ता ने कहा कि घरेलू जानवरों और वन्य जीवन की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी है। ऐसे अकादमिक मंच सहानुभूति, स्थिरता और मानव-पशु सह-अस्तित्व को मजबूत करने वाली नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रोफेसर (डॉ.) ऋषिकेश डेव, डीन, शारदा स्कूल ऑफ लॉ ने कहा घरेलू जानवरों और वन्य जीवन संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रश्न अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि संवैधानिक और मानवाधिकार विमर्श का भी हिस्सा बन चुके हैं। यह सम्मेलन छात्रों और शोधकर्ताओं को कानून को अधिक मानवीय और उत्तरदायी दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करता है। प्रोफेसर (डॉ.) रॉबर्ट सुकी, वाईस रेक्टर, कारोली गास्पार विश्वविद्यालय, हंगरी ने कहा कि शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से पर्यावरणीय और पशु संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाना आज की आवश्यकता है। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो समाज और प्रकृति के प्रति उत्तरदायी नेतृत्व तैयार करने की दिशा में केंद्रित है।

