द न्यूज गली, नोएडा : नोएडा प्राधिकरण में विभिन्न गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर तीन अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। उद्यान विभाग के उप निदेशक, सिविल के वर्क सर्किल-4 के प्रभारी और विद्युत यांत्रिक सर्कल-1 के प्रभारी को उनके पदों से हटाकर कार्मिक विभाग से संबद्ध कर दिया गया है। इन अधिकारियों का नाम अलग-अलग मामलों में सामने आया था, जिनकी शिकायतें पहले से प्राधिकरण के पास लंबित थी।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद वर्क सर्किल प्रभारी को हटाया गया
वर्क सर्किल-4 के प्रभारी वरिष्ठ प्रबंधक अशोक कुमार को हटा दिया गया है। मामला सेक्टर-63 छिजारसी में एक निर्माण कार्य और उस पर की गई तोड़फोड़ से जुड़ा हुआ है। निर्माण स्थल पर हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर था, लेकिन वर्क सर्किल प्रभारी की ओर से यह कहते हुए निर्माण तोड़ा गया कि स्टे के बावजूद नया निर्माण किया गया था। इस पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जिसने इसे अवमानना माना और प्राधिकरण के सीईओ को तलब किया। जांच के बाद वरिष्ठ प्रबंधक अशोक कुमार को वर्क सर्किल से हटा दिया गया और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

स्ट्रीट लाइट घोटाले में विद्युत यांत्रिक सर्कल-1 के प्रभारी पर गिरी गाज
विद्युत यांत्रिक सर्किल-1 के प्रभारी प्रदीप कुमार को हटाने के आदेश दिए गए है। उनके खिलाफ लगे आरोपों में स्ट्रीट लाइट केबल बिधाने के घोटाले का मामला प्रमुख है। नवंबर 2023 में सेक्टर-142 से 144 तक केबिल बिछाने, पोल लगाने औऱ स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य 1.48 करोड़ रुपये में किया जाना था। इस काम के लिए तय समय मई 2024 थी, लेकिन अब तक केवल 40% कार्य ही पूरा हो पाया है।

एस्टिमेट में दिखाई गई अधिक मात्रा
जांच में सामने आया है कि एस्टिमेट में सामान की अधिक मात्रा दर्शाकर अनुबंध तैयार किया गया था। इस पर प्राधिकरण ने शासन को पत्र भेजकर निलंबन की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक शासन से कोइ कार्रवाई नहीं हुई थी।

उद्यान विभाग में टेंडर घोटाले में उप निदेशक पर कार्रवाई
उद्यान विभाग के उप निदेशक राजेंद्र सिंह को भी कार्मिक विभाग से संबद्ध कर दिया गया है। हालांकि आदेश में सीधे कारण का जिक्र नहीं किया गया, लेकिन उनके खिलाफ नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर उद्यान विभाग के टेंडर घोटाले का मामला सामने आया था। मिली जानकारी के मुताबिक एक ही कार्य के दो टेंडर निकालने की तैयारी थी, जिसे रोकते हुए प्राधिकरण ने जांच कराई और शासन को कार्रवाई की सिफारिश भेजी थी। हाल ही में सीईओ निरीक्षण के दौरान एक्सप्रेसवे किनारे औद्यानिक कचरा मिलने पर भी राजेंद्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

सीईओ ने कोर्ट में दी सफाई, अगली सुनवाई 8 हफ्ते बाद
इस पूरे प्रकरण में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में पेश होकर कार्रवाई का ब्यौरा दिया। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए 8 हफ्ते बाद अगली सुनवाई की तारीख दी है।