-लोगों से कर चुके हैं 70 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी
-आरोपितों के पास से 9 भारतीय पासपोर्ट, 7 फर्जी जॉब लेटर व अन्य सामान हुआ बरामद
द न्यूज गली, नोएडा: नोएडा सेक्टर 126 कोतवाली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने दो शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। उनके द्वारा विदेश में नौकरी दिलाने का भ्रामक प्रचार कर लोगों को अपनी जाल में फंसाया जाता था। जिसके बाद लोगों से पैसों की वसूली होती थी। जांच में सामने आया है कि ठगों के द्वारा अब तक 100 से अधिक लोगों को निशाना बनाया जा चुका है। ठगों ने जिन लोगों को अपनी जाल में फंसाया उनसे 70 लाख रुपए से अधिक की रकम ठगी गई। आरोपितों की पहचान नियाज अहमद उर्फ अरमान राजू के रूप में हुई है। उनके पास से 9 भारतीय पासपोर्ट, 4 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 7 फर्जी जॉब पम्पलेट, 7 फर्जी एयरलाइन टिकट, 9 फर्जी वीज़ा के प्रिंटआउट व लोगों से धोखाधडी कर अर्जित किए गए 73,500 रुपये नगद बरामद।
घटना का तरीका
ठगों के द्वारा लैपटॉप से विदेशी कंपनियों के नाम पर आकर्षक एवं लुभावने फर्जी/कूटरचित नौकरी विज्ञापन तैयार करते थे। जिनमें ऊँची सैलरी, फ्री वीज़ा, फ्री टिकट, सीमित सीटें एवं तत्काल जॉइनिंग का झांसा दिया जाता था। अभियुक्तों के द्वारा इंटरनेट पर ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल, फेसबुक पेज एवं अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म खोजते थे, जहाँ भारत में पंजीकृत बड़ी मैनपावर कंपनियाँ, विदेश रोजगार कंसल्टेंसी अथवा नौकरी से संबंधित समूह सक्रिय रहते हैं। अभियुक्त इन ग्रुपों में सदस्य बनने हेतु रिक्वेस्ट भेजते थे और एक बार जुड़ने के बाद अपने द्वारा तैयार किए गए फर्जी/कूटरचित कूटरचित विज्ञापन पम्पलेट, जिन पर फर्जी कंपनी (FUTURE LIGHT MANPOWER) का नाम डालकर व अपने मोबाइल नंबर व ईमेल आईडी अंकित रहते थे, उक्त ग्रुपों में प्रसारित कर देते थे ताकि अधिक से अधिक लोग सीधे उनसे संपर्क करें। जब इच्छुक व्यक्ति संपर्क करते थे तो अभियुक्त केवल व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे ताकि अपनी वास्तविक पहचान, स्थान एवं ट्रैकिंग से बच सकें। तत्पश्चात वे फर्जी/कूटरचित ऑफर लेटर, वीज़ा एवं विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों के टिकटों के कूटरचित प्रिंटआउट भेजकर पीड़ितों का विश्वास अर्जित करते थे। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, वीज़ा चार्ज, मेडिकल फीस, एम्बेसी अप्रूवल, टिकट कन्फर्मेशन एवं अन्य औपचारिकताओं के नाम पर चरणबद्ध तरीके से मोटी धनराशि वसूलते थे। वीज़ा प्रक्रिया के बहाने पीड़ितों के मूल पासपोर्ट अपने कब्जे में रख लेते थे ताकि पीड़ित उन पर निर्भर बना रहे और अतिरिक्त धन देने के लिए बाध्य हो। धनराशि प्राप्त करने के बाद वे संपर्क सीमित कर देते थे अथवा स्थान बदलकर फरार हो जाते थे।
