द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा : किसानों की लंबित समस्याओं और प्रशासन की ओर से लगातार दिए जा रहे आश्वासनों से नाराज किसान संघर्ष मोर्चा ने 9 सितंबर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर धरना-प्रदर्शन और घेराव करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को जैतपुर स्थित किसान सभा के कार्यालय में मोर्चा की कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया। मोर्चा नेताओं ने कहा कि 17 जुलाई को 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट समेत किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन किया गया था। उस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर तीनों प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ किसानों की वार्ता कराने का आश्वासन दिया था। आरोप है कि इसके बाद लगातार तारीखें दी जाती रहीं, लेकिन किसानों की समस्याओं पर अधिकारियों के साथ वार्ता नहीं हो सकी। किसानों का कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखा और बड़ी संख्या में गिरफ्तारी दी। किसान नेताओं का आरोप है कि 18 से 25 अगस्त तक लगातार वार्ता की तारीख टलती रही। अब 27 अगस्त को केवल पुलिस कमिश्नर स्तर पर वार्ता की बात कही गई है, जबकि प्राधिकरणों के सीईओ के साथ किसानों की बैठक कब होगी, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इससे किसानों में नाराजगी है।

10 प्रतिशत आबादी प्लॉट समेत कई मांगें
किसान संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने कहा कि किसानों के 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट, नए कानून, आबादी के लंबित मामलों, अतिरिक्त मुआवजे और सर्किल रेट में बढ़ोतरी समेत कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। मोर्चा का दावा है कि नोएडा में करीब 3,800, ग्रेटर नोएडा में 854 और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में करीब 900 आबादी संबंधी प्रकरण लंबित हैं। ग्रेटर नोएडा में 500 से अधिक किसान 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे से वंचित बताए गए हैं। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 के आंदोलन के बाद 10 प्रतिशत प्लॉट का प्रस्ताव प्राधिकरण बोर्ड से पारित कर शासन के अनुमोदन के लिए भेजा गया था, लेकिन अभी तक उसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने सर्किल रेट के पुनरीक्षण का मुद्दा भी उठाया। किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण के अधिकारी किसानों के मुद्दों का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाने और टालने की कोशिश कर रहे हैं। किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने कहा कि लगातार आश्वासन मिलने के बाद अब किसानों के पास निर्णायक आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। किसान सभा के महासचिव संदीप भाटी ने कहा कि 10 प्रतिशत प्लॉट समेत किसानों की सभी मांगों के समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा।किसान संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि 9 सितंबर का आंदोलन निर्णायक होगा। मोर्चा ने शासन और तीनों प्राधिकरणों से किसानों की लंबित समस्याओं पर तत्काल वार्ता शुरू कर ठोस समाधान निकालने की मांग की है।