-कोरियाई पद्धति से हुआ ध्यान-सत्र

द न्यूज़ गली, ग्रेटर नोएडा: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के महात्मा ज्योतिबा फुले ध्यान केन्द्र में दक्षिण कोरिया से पधारे बौद्ध विद्वान भिक्षु हिडाल का अकादमिक व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन बौद्ध अध्ययन एवं सभ्यता संकाय, जीबीयू तथा वाया इण्डिया के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. मनीष मेश्राम एवं डॉ. ज्ञानादित्य शाक्य के समन्वयन में हुआ। व्याख्यान का विषय था “भारत–कोरिया धम्म को संवाद: एक धम्म, दो भूमि — ध्यान और विपस्सना के माध्यम से भारत–कोरिया के बौद्ध सम्बन्ध”। कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा बुद्ध-प्रतिमा के समक्ष पुष्पार्पण एवं दीप-प्रज्वलन से हुआ। संकाय के विद्यार्थियों ने बुद्ध-वन्दना एवं मंगल-पाठ प्रस्तुत किया। विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानादित्य शाक्य ने स्वागत भाषण में भिक्षु हिडाल का परिचय कराया। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म ने भारत और कोरिया के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

ध्यान का बताया लाभ

भिक्षु हिडाल ने कहा कि व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में — चाहे कोरोना जैसी महामारी हो या दैनिक जीवन की सामान्य परेशानियाँ — ध्यान कर सकता है। उन्होंने बताया कि ध्यान एवं विपस्सना के नियमित अभ्यास से चित्त की सजगता और एकाग्रता बढ़ती है, जिससे जीवन में सुख और शान्ति आती है। व्याख्यान के बाद उन्होंने प्रतिभागियों को कोरियाई पद्धति से ध्यान का अभ्यास भी कराया। विशिष्ट अतिथि कोरियाई भिक्षु इरम ने भिक्षु सोंगचोल द्वारा रचित पुस्तक की उपादेयता पर प्रकाश डाला। उन्होंने ध्यान एवं विपस्सना को मानव जीवन के तनाव को दूर कर वास्तविक सुख-शान्ति पाने का महत्वपूर्ण साधन बताया और इसके दैनिक अभ्यास पर बल दिया। बौद्ध अध्ययन एवं सभ्यता संकाय की पूर्व अधिष्ठाता प्रो. श्वेता आनन्द ने आज के समय में ध्यान एवं विपस्सना की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और आयोजन की सफलता के लिए समन्वयकों को बधाई दी। इस अवसर पर समन्वयकों ने भिक्षु हिडाल एवं भिक्षु इरम को जीबीयू का स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। डॉ. चिन्ताला वेंकटा सिवासाई, डॉ. प्रियदर्शिनी मित्रा, डॉ. सोभाराम, डॉ. सिद्दरामू बी. तथा संकाय के विद्यार्थियों ने दक्षिण कोरिया से आए 22 से अधिक अतिथियों का खादा (पारम्परिक दुपट्टा) पहनाकर स्वागत किया। समन्वयक डॉ. मनीष मेश्राम ने धन्यवाद-ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा महात्मा ज्योतिबा फुले ध्यान केन्द्र द्वारा संचालित विविध गतिविधियों एवं पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने भिक्षु हिडाल, कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, अधिष्ठाता प्रो. राजीव वार्ष्णेय, पूर्व अधिष्ठाता प्रो. श्वेता आनन्द, विभागाध्यक्ष डॉ. शाक्य, देवेश तिवारी, कविता, नवनीत सिंह, संकाय सदस्यों एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।