-2000 वर्गमीटर तक के औद्योगिक भूखंडों का आवंटन लॉटरी से कराने की मांग
-मांग के समर्थन में उद्यमियों ने बनाई मुख्‍यमंत्री से मिलने की योजना

द न्‍यूज गली, ग्रेटर नोएडा: नए नियम के तहत औद्योगिक भूखंड का आवंटन ई-नीलामी से होता है। आवंटन की यह नीति उद्यमियों को पसंद नहीं आ रही है। उद्यमी संगठन इंडस्ट्रियल एंट्रेपरेणुर्स एसोसिएशन(IEA) नियम के विरोध में लगातार अपनी आवाज को बुलंद कर रहा है। विरोध में संगठन ने होली का पर्व न मनाने का बड़ा निर्णय लिया है। संगठन के सदस्‍यों ने प्रेसवार्ता कर अपनी नाराजगी जताई। आईईए के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि ई-नीलामी प्रणाली के कारण वास्तविक एवं लघु उद्योग संचालकों को भारी आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था से छोटे और मध्यम उद्यमी औद्योगिक भूखंड प्राप्त करने में असमर्थ हो रहे हैं, जिससे औद्योगिक विकास प्रभावित हो रहा है। संगठन के सदस्‍यों की मांग है की कि 2000 वर्गमीटर तक के औद्योगिक भूखंडों का आवंटन ड्रॉ (लॉटरी) प्रणाली के माध्यम से किया जाए। जिससे सभी पात्र उद्योगों को समान अवसर मिल सके। साथ ही, लंबे समय से किराए पर उद्योग संचालित कर रहे उद्यमियों को भूखंड आवंटन में प्राथमिकता दी जाए।

पैसे वालों की चांदी
संगठन के सदस्‍यों का कहना है कि औद्योगिक भूखंड नीलामी प्रक्रिया की वजह से निवेशक उच्च बोली लगाकर भूखंड खरीद लेते है और बाद में महंगे दामो पर बेचते है या किराए पर दे देते है। आज के समय मे इतने महंगे दामो पर भूखंड खरीद कर उद्योग लगाना एक सपने जैसा होता जा रहा है। बैंक बिना कोलेट्रल के छोटे उद्यमियों को लोन नही देते जिससे छोटे उद्यमी उद्योग लगाने के बाद भी उद्यो नहीं चला पाते हैं। अपनी फैक्ट्री होने से विपरीत परिस्थितियों में भी उद्यमी किराए का बोझ न होने के कारण उबर जाता है लेकिन आज की स्थिति में किराए का बोझ उद्यमी को उद्योग बंद करने पर विवश कर देता है। उद्यमियों का कहना है कि आईईए का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को DM के माध्यम से ज्ञापन सौंपेगा, जिसमें ई-नीलामी नीति को समाप्त कर ड्रॉ प्रणाली लागू करने तथा किराए पर संचालित उद्योगों को प्राथमिकता देने की मांग दोहराई जाएगी। संजीव शर्मा, पूर्व पीके तिवारी, एच एन शुक्ला, गुरदीप सिंह तुली, पीएस मुखर्जी, विवेक चौहान, एमपी शुक्ला, सूर्यकांत तोमर उपस्थित थे।