द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा: अधिवक्ता परिषद उत्तर प्रदेश उत्तराखंड व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। संविधान के प्रथम संशोधन के 75 वर्ष पश्चात वर्तमान परिवेश में उसकी उपयोगिता विषय पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को संविधान के पूर्णतया लागू होने के उपरांत 16 महीने के अंतराल पर ही संविधान संशोधन की आवश्यकता पड़ गई। प्रथम संविधान संशोधन के पृष्ठभूमि में को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा बृजभूषण बनाम दिल्ली राज्य एवं रमेश थापर के मामले में वर्ष 1950 में दिए गए निर्णय ने प्रथम संविधान संशोधन की नींव रखी। अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्रदत्त वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के निर्बंधन के विषय में उपरोक्त दोनों निर्णय महत्वपूर्ण हैं। बृजभूषण मामले में उच्चतम न्यायालय ने पीस पंजाब सेफ्टी अधिनियम 1949 को असंवैधानिक घोषित करते हुए कहा की प्रेस की स्वतंत्रता को बाधित नहीं किया जा सकता। उपरोक्त अधिनियम में समाचार एजेंसियों पर यह प्रतिबंध लगाया गया था कि समाचार छपने के पूर्व उन्हें उसे सरकार के पास भेजना होगा और सरकार द्वारा अनुमति मिलने पर ही उसे छापा जा सकेगा। रमेश थापर बनाम मद्रास राज्य के बारे में बताते हुए न्यायमूर्ति ने कहा की सरकार द्वारा वितरण संबंधी प्रतिबंध को असंवैधानिक घोषित किया गया। संविधान के प्रथम संशोधन को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा की मूल अधिकारों पर युक्ति युक्त निर्बंधन लगाए गए तथा अनुच्छेद 31 क एवं 31 ख के माध्यम से संपत्ति के अधिकारों संबंधी संशोधन किया गया साथ ही नवी अनुसूची में रखे गए कानून को न्यायिक पुनर्विलोकन के दायरे से बाहर किया गया। शंकरी प्रसाद एवं सज्जन सिंह के निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने संविधान संशोधन को उचित ठहराया। अतिथि परिचय एवं व्याख्यान माला का संचालन उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अनिल जोशी जी द्वारा किया गया। व्याख्यान के मध्य दर्शकों द्वारा किए गए प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का माननीय न्यायमूर्ति ने समाधान किया। बताते चलें की अधिवक्ता परिषद उत्तर प्रदेश उत्तराखंड द्वारा पूर्व में भी व्याख्यान माला का आयोजन किया जा चुका है जिसमें विभिन्न उच्च न्यायालयों के माननीय न्यायमूर्तिगण, वरिष्ठ अधिवक्ताओं सहित विधि आचार्यों ने सहभागिता की थी।इस व्याख्यान में जनपद गौतम बुद्ध नगर से 100 से अधिक अधिवक्ताओं ने सक्रिय सहभागिता की।
