द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में किसानों के हित में कई अहम फैसले लिए गए। अब आपसी सहमति से जमीन देने वाले किसानों को भी भूमि अधिग्रहण के समान सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके साथ ही वर्ष 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण या क्रय से प्रभावित उन किसानों को भी 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर देने का निर्णय लिया गया है, जिन्हें अब तक इसका लाभ नहीं मिल पाया था। बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया कि आपसी सहमति से जमीन देने वाले भू-स्वामियों को पहले निर्धारित दो विकल्पों में से 5725 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर चुनने पर छह प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ मिलेगा। वहीं, 6415 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर का विकल्प चुनने वालों को आबादी भूखंड नहीं दिया जाएगा। यह व्यवस्था 27 अगस्त 2026 के बाद होने वाली भूमि खरीद पर लागू होगी।प्राधिकरण के इस फैसले से भूमि देने वाले किसानों को अपनी पसंद के विकल्प के अनुसार लाभ मिल सकेगा। इसका उद्देश्य आपसी सहमति से जमीन देने वाले किसानों और अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के बीच सुविधाओं को लेकर समानता सुनिश्चित करना है।
पुराने प्रभावित किसानों को भी मिलेगा अतिरिक्त प्रतिकर
बोर्ड ने वर्ष 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण या क्रय से प्रभावित किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। अब ग्रेटर नोएडा के पात्र किसान भी नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों की तरह इस लाभ के दायरे में आ सकेंगे।प्राधिकरण ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन की सहमति मिलने के बाद इसे बोर्ड के समक्ष रखा गया, जहां स्वीकृति दे दी गई। इससे लंबे समय से अतिरिक्त मुआवजे की मांग कर रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
आबादी भूखंड की पात्रता में बदलाव, अब सास-ससुर भी होंगे परिवार में शामिल
किसानों की मांग पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने नियमों में संशोधन को दी मंजूरी। ग्रेटर नोएडा में किसानों को आबादी भूखंड आवंटित करने की पात्रता के नियमों में बदलाव किया जाएगा। अब पात्रता निर्धारित करने में किसान के परिवार के दायरे में सास-ससुर को भी शामिल किया जाएगा। प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अब तक प्रचलित व्यवस्था में पितामह, पितामही, पिता, माता, पति या पत्नी को परिवार के दायरे में शामिल किया गया था। संशोधन के बाद सास-ससुर को भी इसमें जगह मिलेगी। प्राधिकरण का उद्देश्य पात्र किसानों को आबादी भूखंड का लाभ दिलाना और नियमों के कारण उन्हें अनावश्यक रूप से वंचित होने से बचाना है। दरअसल, किसानों की ओर से मांग की जा रही थी कि भूमि अर्जन की कार्रवाई से पहले कई मामलों में जमीन पुत्रवधू के नाम हस्तांतरित कर दी जाती है। ऐसी स्थिति में प्राधिकरण की प्रचलित नीति के तहत पुत्रवधू को आबादी भूखंड आवंटन का लाभ मिलने में परेशानी आती है। इसी को देखते हुए पात्रता संबंधी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया।संशोधित व्यवस्था के तहत भी किसान का अधिसूचित क्षेत्र का मूल निवासी होना और संबंधित भूमि का निर्धारित शर्तों के अनुरूप राजस्व अभिलेखों में दर्ज होना आवश्यक होगा। नियमों में बदलाव से प्रभावित परिवारों को आबादी भूखंड आवंटन का लाभ मिलने की उम्मीद है।
लीज बैक के मामलों में किसानों को राहत, ब्याज माफी का प्रस्ताव शासन को भेजेगा प्राधिकरण
ग्रामीण आबादी की जमीन के लीज बैक मामलों में किसानों को राहत देने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पहल की है। लीज बैक के लिए जमा की जाने वाली धनराशि पर लगने वाले ब्याज को माफ करने के प्रस्ताव को बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इसके लिए ग्रामीण आबादी स्थल प्रबंधन एवं विनियमितीकरण विनियमावली में संशोधन कर प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।दरअसल, लीज बैक के लिए निर्धारित धनराशि का भुगतान तय समय में नहीं करने पर किसानों को ब्याज देना पड़ता है। भुगतान में तीन माह से अधिक की देरी होने पर निर्धारित दर से ब्याज लगने का प्रावधान है। वहीं, एक वर्ष के भीतर भुगतान नहीं होने पर पट्टा निरस्त किए जाने की व्यवस्था भी है। किसानों की ओर से लंबे समय से ब्याज माफी की मांग की जा रही थी।बोर्ड की मंजूरी के बाद अब प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित नियमों में संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
किसानों के हिस्से के अनुसार होगी लीज डीड
बोर्ड बैठक में ग्रामीण आबादी के मामलों में किसानों को लीज बैक का लाभ देने के लिए नई प्रक्रिया अपनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। इसके तहत संबंधित किसानों के हिस्से का निर्धारण कर उनके पक्ष में लीज डीड कराई जाएगी। यह प्रक्रिया शासनादेश 24 अप्रैल 2010, ग्रामीण आबादी स्थल प्रबंधन एवं विनियमितीकरण विनियमावली-2011 और इसके 2015 के संशोधित प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाई जाएगी। इससे अधिग्रहित और कब्जा प्राप्त भूमि के एवज में किसानों के पक्ष में लीज बैक की कार्रवाई को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
लिंक रोड से विस्थापित किसानों को भूखंड की लीज डीड का लाभ
गाजियाबाद में न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर फैक्ट्री से एनएच-24 (अब एनएच-9) तक लिंक रोड निर्माण से प्रभावित किसानों को राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में ग्राम चिपियाना खुर्द उर्फ तिगरी में उपलब्ध 5.48 एकड़ जमीन पर पात्र किसानों के पुनर्वास और उनके पक्ष में भूखंड की लीज डीड कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। लीज डीड पर होने वाला खर्च भी प्राधिकरण वहन करेगा।इस व्यवस्था का लाभ उन मूल किसानों को मिलेगा, जिनकी जमीन सड़क निर्माण की जद में आई थी और जिनके नाम संबंधित राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं। प्राधिकरण अब पात्र किसानों के दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद लीज डीड की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।दरअसल, इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर प्राधिकरण की ओर से गठित समिति ने 17 जून 2026 की बैठक में पात्र किसानों से आवश्यक दस्तावेज लेकर उनका सत्यापन करने के बाद प्रस्ताव आगे बढ़ाने की संस्तुति की थी। इसके बाद बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव रखा गया।
ये दस्तावेज देने होंगे
पात्र किसानों को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से जारी आवंटन पत्र की मूल प्रति और नक्शा-11 की सत्यापित प्रति देनी होगी। इसके विकल्प के रूप में किसान द्वारा क्रय किए गए खसरे की जमीन की बैनामा मूल प्रति प्रस्तुत करनी होगी। दस्तावेजों का सत्यापन गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से कराया जाएगा। इसके बाद पात्र किसानों के पक्ष में लीज डीड की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ईकोटेक-1 में बनेगा सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र
ग्रेटर नोएडा में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र विकसित किया जाएगा। इसके लिए सेक्टर ईकोटेक-1 में 32,880 वर्गमीटर यानी करीब आठ एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में जमीन आरक्षित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह भूमि औद्योगिक भूखंड संख्या-01 में चिह्नित की गई है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग की सहमति के बाद इसका निशुल्क आवंटन किया जाएगा।
इस केंद्र का उद्देश्य युवाओं को उद्योगों और सेवा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना है। योजना के तहत तकनीकी और गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि के युवाओं के लिए कौशल विकास और भाषा प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही प्लेसमेंट संबंधी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। केंद्र के माध्यम से स्थानीय युवाओं को देश के दूसरे राज्यों और विदेशों में रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर रहेगा। प्रशिक्षणार्थियों के लिए हॉस्टल, कार्यालय और प्लेसमेंट सेल जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। केंद्र के स्थापित होने से क्षेत्र के युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है।
ईकोटेक-1 एक्सटेंशन में बनेगा पुलिस थाना
ईकोटेक-1 एक्सटेंशन क्षेत्र में पुलिस थाना स्थापित करने की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कदम बढ़ाया है। ग्राम कासना में प्रस्तावित पुलिस स्टेशन के निर्माण के लिए 3957 वर्गमीटर जमीन निशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में मंजूरी मिल गई। अपर पुलिस आयुक्त, मुख्यालय, गौतमबुद्धनगर की ओर से ग्राम कासना में पुलिस स्टेशन बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इसके बाद प्राधिकरण के परियोजना विभाग ने ईकोटेक-1 एक्सटेंशन में भूखंड चिह्नित कर पुलिस विभाग को लीज प्लान उपलब्ध कराया था। पुलिस विभाग ने 31 जुलाई 2025 को लीज डीड कराने के लिए सहमति देते हुए अनुरोध किया था।प्रस्ताव में औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की विकसित योजनाओं में पुलिस थानों और चौकियों के लिए आवश्यक जमीन निशुल्क हस्तांतरित करने संबंधी शासन की नीति का भी उल्लेख किया गया है।ग्रेटर नोएडा में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। ऐसे में नए थाने की स्थापना से औद्योगिक इकाइयों, कर्मचारियों, उद्यमियों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षा संबंधी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। बोर्ड की मंजूरी के बाद अब जमीन के निशुल्क आवंटन और थाने के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
