द न्यूज गली, नोएडा : पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर फर्जी लोन सेंक्शन लेटर भेजने और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ठगी करने वाले साइबर गिरोह के दो आरोपियों को थाना साइबर क्राइम नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल विश्लेषण, सर्विलांस और गोपनीय सूचना के आधार पर खोड़ा कॉलोनी, गाजियाबाद से गिरफ्तार किया।
डाटा का करते थे गलत यूज
पुलिस ने बताया कि यह गिरोह RuLoans कंपनी से प्राप्त डाटा का दुरुपयोग कर लोन की जरूरत वाले लोगों को निशाना बनाता था। आरोपियों द्वारा पहले लोगों को पर्सनल लोन दिलाने का झांसा दिया जाता था और फिर विश्वास में लेने के लिए फर्जी लोन सेंक्शन लेटर भेजा जाता था। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस समेत अन्य शुल्क के नाम पर रकम ठगी जाती थी।मामले में थाना साइबर क्राइम नोएडा में केस दर्ज है। इसी मुकदमे में दो आरोपी पूर्व में 15 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। अब पुलिस ने गिरोह से जुड़े दो और वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
10 फीसदी कमीशन पर देते थे बैंक खाते
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह अपने बैंक खाते और अन्य म्यूल बैंक खातों को साइबर अपराधियों को 10 प्रतिशत कमीशन पर उपलब्ध कराते थे। इन खातों में साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती थी। रकम आने के बाद आरोपी अपना कमीशन काटकर बाकी पैसा साइबर अपराधियों को वापस उपलब्ध करा देते थे।
आरोपियों के बैंक खाते में मिली रकम
आरोपी तुषार के बैंक खाते में 1.20 लाख रुपये और सुमित के खाते में 2.20 लाख रुपये, यानी कुल 3.40 लाख रुपये साइबर ठगी की रकम प्राप्त हुई। इन बैंक खातों के संबंध में महाराष्ट्र और तमिलनाडु से NCRP पोर्टल पर कुल दो शिकायतें भी दर्ज हैं।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 21 वर्षीय तुषार पुत्र कपिल देव और 21 वर्षीय सुमित कुमार पुत्र रामेश्वर प्रसाद, दोनों निवासी खोड़ा कॉलोनी, गाजियाबाद के रूप में हुई है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सहयोगियों, बैंक खातों, वेबसाइटों और डिजिटल नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क के बारे में और अहम जानकारी सामने आ सकती है।
पुलिस ने लोगों को किया सावधान
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस ने फर्जी निवेश ऑफर, अनजान लिंक और लोन दिलाने के नाम पर मांगी जाने वाली प्रोसेसिंग फीस से सावधान रहने की सलाह दी है।साथ ही पुलिस ने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, CBI, ED, नारकोटिक्स या इनकम टैक्स अधिकारी बनकर फोन पर डराए और गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे मांगे तो घबराएं नहीं और तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क करें।
