द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा : जेवर कोतवाली क्षेत्र के मेंहदीपुर गांव में वर्ष 2012 में पुलिस टीम पर हुए हमले के मामले में अदालत ने सातों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि पुलिस टीम के गांव पहुंचने की बात साबित है, लेकिन घटना के दौरान भीड़ में शामिल आरोपियों की मौजूदगी साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।अभियोजन के अनुसार, 18 अप्रैल 2012 को कासगंज थाने में दर्ज अपहरण के मामले में वांछित आरोपी सोहलीन की गिरफ्तारी के लिए उपनिरीक्षक राजेंद्र प्रसाद सारस्वत पुलिस टीम के साथ मेंहदीपुर गांव पहुंचे थे। आरोप है कि दबिश के दौरान गांव के करीब 30 लोगों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया और पकड़े गए आरोपी सोहलीन को जबरन छुड़ा लिया। इस मामले में जेवर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था।
आरोपियों की पहचान के नहीं मिले ठोस साक्ष्य
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस टीम के गांव जाने की बात गवाहों के बयानों से साबित होती है और इस संबंध में कोई गंभीर विरोधाभास भी नहीं है। हालांकि, हमले के दौरान भीड़ में शामिल सातों आरोपियों की व्यक्तिगत मौजूदगी साबित करने के लिए कोई विशिष्ट साक्ष्य नहीं मिला।
वादी उपनिरीक्षक ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि आरोपियों के नाम जेवर पुलिस के बताए जाने पर लिखाए गए थे। वहीं, विवेचक ने आरोपियों की शिनाख्त परेड नहीं कराई थी और उनकी गिरफ्तारी भी उसके सामने नहीं हुई थी। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अदालत ने सभी सातों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
