द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा: योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (YSS) के नोएडा आश्रम में भक्तिमय कीर्तन और ध्यान की एक अत्यंत प्रेरणादायक संध्या आयोजित हुई। जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने शांति और आंतरिक उत्थान के शक्तिशाली सामूहिक अनुभव में भाग लिया। यह कार्यक्रम 18 अप्रैल, 1926 की ऐतिहासिक संध्या को स्मरण कराता है, जब परमहंस योगानन्दजी ने न्यूयॉर्क के कार्नेगी हॉल में पश्चिमी जगत् के सामने भक्तिमय कीर्तन का परिचय कराया था। कार्यक्रम में आए लोग ओ गॉड ब्यूटीफुल (O God Beautiful) के कीर्तन में सम्मिलित हुए। जिससे गहन आध्यात्मिक परिवर्तन का वातावरण निर्मित हुआ था, जो उनके मंच छोड़ने के बाद भी जारी रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए, स्वामी स्मरणानन्द ने इस शताब्दी के गहरे महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। स्वामी स्मरणानन्दजी ने बल दिया कि आत्म-शक्ति से परिपूर्ण संगीत ही वास्तविक विश्वव्यापी संगीत है, जो सभी हृदयों द्वारा समझा जा सकता है। इस प्रकार भक्तिमय कीर्तन की सार्वभौमिकता को परमात्मा तक पहुँचने के प्रत्यक्ष मार्ग के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने आगे समझाया कि भक्तिमय कीर्तन केवल एक संगीतमय अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि एक वैज्ञानिक आध्यात्मिक अभ्यास है। योगानन्द की शिक्षाओं के अनुसार, यह मन को एकाग्र करता है, भक्ति जाग्रत करता है और चेतना को अंतर्मुखी बनाता है। उन्होंने कहा कि कीर्तन ध्यान में आधी लड़ाई को जीतने के समान है, क्योंकि यह साधक को शीघ्रता से गहन जागरूकता और आंतरिक शांति की अवस्था में ले जाता है।

कीर्तन एक कला
स्वामी स्मरणानन्द ने यह भी बताया कि भक्तिमय कीर्तन एक कला है, जिसमें निष्ठा, भावना और आंतरिक तल्लीनता आवश्यक है। सच्चा कीर्तन, उन्होंने कहा, शब्दों और ध्वनि से परे जाकर साधक को परमात्मा से जोड़ देता है। कार्यक्रम का समापन स्वामी अद्यानन्द के संक्षिप्त संबोधन से हुआ, जिन्होंने उपस्थित लोगों को वाईएसएस (YSS) की शिक्षाओं के और अधिक अध्ययन के लिए प्रेरित किया, जिसमें राजयोग का मार्ग शामिल है, जो भक्ति, ध्यान और संतुलित जीवन का समन्वय करता है। विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। यह नोएडा सभा एक वैश्विक शताब्दी समारोह का हिस्सा थी, जिसमें उसी दिन संयुक्त राज्य अमेरिका के कार्नेगी हॉल में एक समानांतर कार्यक्रम आयोजित किया गया—जो भक्ति की सार्वभौमिक भाषा के माध्यम से विश्वभर के हृदयों को जोड़ता है। जैसे-जैसे संध्या समाप्त हुई, एक संदेश सभी के भीतर गूंजता रहा। जब संगीत भक्ति से परिपूर्ण हो जाता है, तो वह केवल ध्वनि नहीं रहता—वह दिव्य अनुभव का माध्यम बन जाता है।

