-स्‍कूलों के द्वारा पात्रों को नहीं दिया जा रहा एडमीशन
-एडमीशन के लिए भटक रहे 900 से अधिक अभिभावक

द न्‍यूज गली, ग्रेटर नोएडा: स्‍कूलों में नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है लेकिन प्रदेश सरकार की महत्‍वपूर्ण योजना निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम(आरटीई) के तहत छात्रों को निजी स्‍कूलों में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। एडमीशन देने में निजी स्‍कूलों के द्वारा सरकारी आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। आलम यह है कि लगभग 900 से अधिक छात्र प्रवेश पाने के लिए परेशान हैं, अभिभावक स्‍कूलों का चक्‍कर लगाकर थक चुके हैं। मुख्‍य विकास अधिकारी भालचंद्र त्रिपाठी ने निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) की समीक्षा की। स्‍कूलों को निर्देश दिया है कि पात्र छात्रों को प्रवेश दें। प्रवेश न देने पर नोटिस जारी कर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

यह स्‍कूल कर रहे मनमानी
आरटीई के तहत 4330 सीट आवंटित है, इन सीटों पर प्रवेश के लिए पात्रों को आवंटन पत्र जारी कर दिया गया है। नोटिस जारी होने के बाद भी लगभग 950 पात्रों को निजी स्‍कूल प्रवेश नहीं दे रहे हैं। जिन स्‍कूलों के द्वारा आदेशों का उल्‍लंघन किया जा रहा है उसमें प्रमुख रूप से डीपीएस, एमिटी इंटरनेशनल, लोटस वैली, बाल भारती, शिव नाडर, रामाज्ञा सहित अन्‍य बड़े नाम शामिल हैं। समीक्षा के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने सभी निजी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उन्हें आवंटित लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया जाए तथा प्रत्येक प्रवेश की सूचना शिक्षा विभाग के पोर्टल पर समयबद्ध रूप से अपडेट की जाए। उन्होंने कहा कि आरटीई योजना का उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, इसलिए किसी भी पात्र बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को निर्देशित किया कि चयनित बच्चों एवं उनके अभिभावकों के साथ सहयोगात्मक एवं संवेदनशील व्यवहार किया जाए तथा प्रवेश प्रक्रिया के दौरान आने वाली किसी भी समस्या का त्वरित समाधान किया जाए। शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई चयनित बच्चों की सूची के आधार पर प्राथमिकता के साथ प्रवेश की कार्यवाही पूर्ण की जाए। उन्होंने कहा कि निर्धारित समयावधि में प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण न करने अथवा पात्र बच्चों को प्रवेश देने में अनावश्यक विलंब करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर उनकी मान्यता निरस्त करने की संस्तुति भी की जा सकती है।