-लंबे समय बाद भी किसानों की मांग नहीं हुई है पूरी
-किसानों से किए गए वादे नहीं हुए पूरे
द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा: अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में किसानों ने 17 जुलाई को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर आंदोलन की चेतावनी दी है। जिला कांग्रेस कमेटी गौतमबुद्ध नगर किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया है। ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब में हुई पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर का किसान केवल अपनी जमीन का मालिक नहीं, बल्कि इस जिले के विकास का सबसे बड़ा भागीदार है। यदि किसान के अधिकारों का संरक्षण नहीं होगा तो विकास का कोई भी मॉडल न्यायपूर्ण नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से गौतमबुद्ध नगर के किसान अपने संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। प्राधिकरणों और सरकार ने अनेक बार किसानों से वादे किए, समितियां गठित कीं, लेकिन अधिकांश समितियों की रिपोर्टें आज तक सार्वजनिक नहीं की गईं और उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे किसानों का विश्वास लगातार कमजोर हुआ है।
Greater Noida: 17 जुलाई को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर होने वाले संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन को कांग्रेस ने दिया समर्थन @CHOTIWALA @INCIndia pic.twitter.com/7gu1a9Ol0h
— The News गली (@The_News_Gali) July 15, 2026
नहीं मिला अधिकार
दीपक चोटीवाला ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे आज भी अधर में लटके हुए हैं। आबादी निस्तारण, 10 प्रतिशत विकसित भूखंड, लीजबैक, बढ़ा हुआ मुआवजा, विस्थापित किसानों के अधिकार, स्थानीय युवाओं को रोजगार तथा अन्य लंबित मांगों का आज तक संतोषजनक समाधान नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों का अहित करने के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय समिति (SIT) से भी किसानों में असंतोष और बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और प्राधिकरणों द्वारा समय-समय पर निर्धारित समय-सीमा में समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन अधिकांश आश्वासन केवल कागजों तक सीमित रह गए। आज स्थिति यह है कि पूर्व में लिखित समझौतों को भी प्राधिकरण के अधिकारी मानने से इंकार कर रहे हैं। किसानों को परेशान करने के नित नए-नए तरीके ढूंढे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के प्रति प्रशासन का रवैया संवेदनशील होने के बजाय दमनात्मक दिखाई देता है। किसानों की समस्याओं का समाधान करने के स्थान पर आंदोलनों को दबाने और आवाज़ उठाने वालों पर दबाव बनाने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। इस अवसर पर दुष्यंत नागर, मुकेश शर्मा, गौतम अवाना, रमा नैय्यर, नीरज लोहिया, देवेश चौधरी, महाराज सिंह नागर, निशा शर्मा, अरुण भाटी, सुबोध भट्ट आदि पदाधिकारी मौजूद थे।
