-निजी अस्पतालों की लूट से परेशान है आम जनता
-नोएडा में 95 प्रतिशत अस्पताल निजी क्षेत्र पास
द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा: नोएडा में निजी अस्पतालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सरकारी अस्पताल बनाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। आंकडों के अनुसार नोएडा में लगभग 95 प्रतिशत निजी अस्पताल हैं। ऐसे में उपचार के लिए आम जन को निजी अस्पतालों की लूट का सामना करना पड़ रहा है। एक्टिव सिटिज़न टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट ग्रेटर नोएडा वेद प्रकाश पांडे को सौंपकर नोएडा में निजी अस्पतालों को जमीन आवंटित करने की बजाय प्राधिकरण द्वारा सरकारी अस्पताल बनाए जाने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि नोएडा अथॉरिटी ने दो अस्पतालों के प्लॉट बोली प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित करने के लिए निकाले हैं, जबकि नोएडा क्षेत्र में पहले से लगभग 95 प्रतिशत अस्पताल निजी क्षेत्र के हैं।
उपचार है महंगा
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि क्षेत्र के लाखों लोगों के पास सस्ते और सुलभ इलाज का कोई प्रभावी विकल्प नहीं है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसे में आम आदमी, नौकरीपेशा वर्ग, किसान और मजदूरों के लिए निजी अस्पतालों का भारी-भरकम खर्च उठाना बेहद कठिन हो जाता है। एक्टिव सिटिज़न टीम ने मांग की कि प्राधिकरण निजी संस्थानों को भूमि देने के बजाय स्वयं सरकारी अस्पतालों का निर्माण करे, ताकि आम जनता को बेहतर और किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। संगठन के सदस्यों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा चार प्लॉट निजी अस्पतालों को आवंटित किए जा चुके हैं, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया था। इसके बावजूद पुनः निजी अस्पतालों के लिए प्लॉट निकाले जाने से लोगों में नाराजगी है। ज्ञापन सौंपने वालों में मंजीत सिंह, साधना सिंहा, हरेंद्र भाटी, आलोक सिंह, सुनील प्रधान व रमेश प्रेमचंदानी उपस्थित थे।
