द न्यूज गली, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह एवं अन्य अधिकारियों के खिलाफ पूर्व कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी की ओर से दायर अवमानना याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने 9 जुलाई 2026 को सुनाए अपने फैसले में कहा कि जिस आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था, उसकी कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियों पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। साथ ही, डॉ. त्रिपाठी की सेवा समाप्ति का आदेश भी अलग याचिका में विचाराधीन है।
लंबे समय से चल रहा विवाद
डॉ. विश्वास त्रिपाठी ने आरोप लगाया था कि 13 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश का पालन नहीं किया गया। उस आदेश में विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें निलंबित किए जाने के निर्णय को निरस्त कर दिया गया था और विश्वविद्यालय के अधिकारियों के आचरण पर न्यायालय ने प्रतिकूल टिप्पणियां भी की थीं।
बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने उक्त आदेश के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की। इस पर 13 अप्रैल 2026 को खंडपीठ ने एकल पीठ की प्रतिकूल टिप्पणियों के प्रभाव पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि डॉ. त्रिपाठी की सेवा समाप्ति का मामला अलग याचिका में लंबित है।
2025 में पद से हटाया गया था
गौरतलब है कि डॉ. विश्वास त्रिपाठी को 29 दिसंबर 2025 को कुलसचिव (रजिस्ट्रार) पद से हटाया गया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और उनके बीच चल रहे विवाद को लेकर विभिन्न याचिकाएं न्यायालय में लंबित हैं।



