द न्यूज गली, नोएडा : गुमशुदा और अपहृत बच्चों के साथ महिला-पुरुषों की तलाश के लिए गौतमबुद्धनगर पुलिस की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने जनवरी 2025 से जुलाई 2026 तक 88 प्रतिशत से अधिक गुमशुदा महिला-पुरुषों को सकुशल बरामद किया है। वहीं, दर्ज मामलों में 95 प्रतिशत से अधिक बालक-बालिकाओं को भी पुलिस ने तलाश कर परिजनों से मिलाया है।
पुलिस ने बताया कि एक जनवरी 2025 से 31 जुलाई 2026 तक कमिश्नरेट के तीनों जोन में 3348 महिला-पुरुषों की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें से 2962 को सकुशल बरामद किया गया, जो कुल मामलों का 88.47 प्रतिशत है। इसी अवधि में 650 बालक-बालिकाओं के संबंध में मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें 619 को सकुशल बरामद किया गया। बच्चों की बरामदगी का प्रतिशत 95.23 रहा।
सेंट्रल नोएडा में सबसे ज्यादा बरामदगी
पुलिस आंकड़ों के मुताबिक सेंट्रल नोएडा जोन में सबसे ज्यादा 1702 महिला-पुरुषों की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें 1555 लोगों को बरामद किया गया। यहां बरामदगी दर 91.36 प्रतिशत रही। नोएडा जोन में 965 मामलों में 810 और ग्रेटर नोएडा जोन में 681 मामलों में 597 लोगों को बरामद किया गया। बच्चों की बरामदगी के मामले में भी सेंट्रल नोएडा जोन का प्रदर्शन बेहतर रहा। यहां 258 मामलों में 252 बच्चों को बरामद किया गया, जबकि नोएडा जोन में 249 में से 236 और ग्रेटर नोएडा जोन में 143 में से 131 बच्चों को सकुशल तलाश लिया गया।
तकनीकी संसाधनों से तलाश
पुलिस का कहना है कि गुमशुदा लोगों की तलाश में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, सोशल मीडिया, मुखबिर तंत्र और मैनुअल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरे जिलों और राज्यों की पुलिस से भी समन्वय कर संभावित ठिकानों पर तलाश की जा रही है। गुमशुदगी से जुड़े मामलों के विश्लेषण के बाद पुलिस ने तीनों जोन में कई हॉटस्पॉट भी चिन्हित किए हैं। इन स्थानों पर नियमित गश्त, संदिग्धों की चेकिंग और सीसीटीवी के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है।
बच्चों और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की तलाश चुनौतीपूर्ण
पुलिस के मुताबिक बच्चों और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। कई बार परिजनों की ओर से पुलिस को सूचना देने में देरी हो जाती है। वहीं कुछ गुमशुदा लोग मोबाइल या सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करते, जिससे उनकी लोकेशन का पता लगाने में परेशानी आती है।
ऐसे मामलों में पुलिस रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, सार्वजनिक स्थानों और आश्रय गृहों में भी तलाश करती है। साथ ही अन्य राज्यों की पुलिस और संबंधित एजेंसियों से समन्वय किया जाता है।
चार महीने बाद मिला मानसिक रूप से अस्वस्थ बालक
पुलिस ने थाना कासना क्षेत्र के एक 10 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ और बोलने में असमर्थ बालक की बरामदगी को अपनी कार्रवाई का उदाहरण बताया है। 11 मार्च 2026 को घर से लापता हुए बालक की तलाश में पुलिस ने स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाने के साथ तकनीकी संसाधनों और सोशल मीडिया की मदद ली। बाद में मथुरा के राजकीय बालगृह से मिली सूचना के आधार पर बालक की पहचान हुई और उसे सकुशल परिजनों को सौंप दिया गया। इसी तरह सेक्टर-49 क्षेत्र से जून में लापता हुईं दो नाबालिग बालिकाओं को भी पुलिस ने सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से तीन दिन में सकुशल बरामद कर लिया था। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में चल रही इस कार्रवाई के तहत पुलिस का कहना है कि शेष गुमशुदा लोगों की बरामदगी के लिए विशेष टीमें लगातार काम कर रही हैं और प्रत्येक मामले की निगरानी की जा रही है।
