द न्यूज गली, नोएडा : थाना साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले में बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी मजदूरों और अन्य लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराता था।
पुलिस ने बताया कि साइबर अपराधियों ने एक व्यक्ति को फोन कर खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताया। आरोपियों ने पीड़ित के मोबाइल नंबर से अश्लील वीडियो भेजे जाने की जांच का भय दिखाकर उसे डिजिटल अरेस्ट जैसा माहौल बनाया और जांच के नाम पर विभिन्न बैंक खातों में 1.29 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर करा ली।
चार आरोपी पहले जा चुके हैं जेल
पीड़ित की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में पुलिस पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण और मुखबिर सूचना के आधार पर पुलिस ने आज आकाश (21 वर्ष) पुत्र नरेश, निवासी नागलोई, थाना निहाल विहार, पश्चिमी दिल्ली को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि वह लोगों के बैंक खाते खुलवाकर प्रति खाता करीब 50 हजार रुपये में साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराता था। आरोपी अब तक लगभग 12 बैंक खाते साइबर गिरोहों को दे चुका है।
13 शिकायतें पोर्टल पर दर्ज मिली
पुलिस के मुताबिक आरोपी के स्वयं के बैंक खाते के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना, केरल, हरियाणा और गुजरात समेत विभिन्न राज्यों से कुल 13 शिकायतें दर्ज हैं। गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है।
पुलिस की अपील
साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती। साथ ही लोगों को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न देने की सलाह दी गई है।
