-सहारा मीडिया कर्मचारियों ने डीएम कार्यालय पर किया प्रदर्शन
-कर्मचारियों ने कहा 2014 से लंबित है बकाया वेतन

द न्‍यूज गली, ग्रेटर नोएडा: 2014 से लंबित बकाया वेतन की मांग को लेकर सहारा मीडिया के कर्मचारी पिछले लगभग 385 दिनों से धरने पर बैठे हैं। मांग पूरी न होने से नाराज कर्मचारियों ने सहारा समूह कर्मकार यूनियन के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने सहारा मीडिया के मालिकों और प्रबंधन के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करते हुए वर्षों से लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की। कर्मचारियों ने मांगों का ज्ञापन एसडीएम अरुण कुमार को दिया। एसडीएम ने आश्वासन दिया कि ज्ञापन को जिलाधिकारी के माध्यम से शीघ्र मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनका बकाया वेतन वर्ष 2014 से लंबित है और बार-बार मांग करने के बावजूद प्रबंधन ने भुगतान नहीं किया।

जारी हो चुका है रिकवरी सर्टिफ‍िकेट
कर्मचारियों ने बताया कि बकाया वेतन की वसूली के लिए उन्होंने श्रम विभाग का दरवाजा खटखटाया था। उप श्रमायुक्त (DLC) द्वारा कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय देते हुए सहारा प्रबंधन के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी किया गया। इसके बाद भी भुगतान नहीं होने पर जिला प्रशासन ने सहारा मीडिया के नोएडा परिसर के कुछ विभागों को सील कराया। बाद में प्रशासन ने लगभग 16 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले नोएडा परिसर की नीलामी का आदेश जारी किया, जिसकी पहली नीलामी 7 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित की गई। इसके बाद कुल चार बार नीलामी की प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन कोई भी नीलामी सफल नहीं हो सकी। ज्ञापन में कर्मचारियों ने कहा कि जब प्रशासन के सभी प्रयासों के बावजूद नीलामी सफल नहीं हुई है, तब अब सहारा मीडिया के मालिकों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कानून सम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सहारा मीडिया के मालिक विदेश में रहकर संस्थान का संचालन कर रहे हैं, जबकि कर्मचारियों को वर्षों से उनका वैधानिक बकाया नहीं मिल पाया है। यूनियन ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों के माध्यम से सीमित संख्या में कर्मचारियों को वेतन देकर धरना कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि अधिकांश कर्मचारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि कर्मचारियों के सामने बच्चों की स्कूल फीस, मकान किराया और इलाज जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने का भी संकट खड़ा हो गया है।