-हांगकांग में जारी वैश्विक रैकिंग में शोध इकोसिस्टम के लिए सराहना
-विश्वविद्यालय अब तक 31 पेटेंट कर चुका है प्राप्त
द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा: गलगोटिया विश्वविद्यालय के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। विश्वविद्यालय ने वैश्विक स्तर पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग-2026 में स्थान प्राप्त किया है। उपलब्धि ने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया है। उच्च शिक्षा संस्थानों के मूल्यांकन में यह रैंकिंग दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित सूचियों में मानी जाती है। भारत के 1300 से अधिक विश्वविद्यालयों में से केवल 128 संस्थानों को इस वर्ष की रैंकिंग में शामिल किया गया है। गलगोटिया विश्वविद्यालय इस चुनिंदा सूची में स्थान पाने वाले संस्थानों में शामिल है। साथ ही भारत के निजी विश्वविद्यालयों में इसे 27वां स्थान प्राप्त हुआ है। जो विश्वविद्यालय की लगातार बढ़ती शैक्षणिक प्रतिष्ठा और प्रभाव को दर्शाता है।
मानकों पर खरी
टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग में विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन शिक्षण गुणवत्ता, शोध वातावरण, शोध गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और उद्योग सहभागिता जैसे प्रमुख मानकों पर किया जाता है। वर्ष 2026 की रैंकिंग में शोध गुणवत्ता गलगोटिया विश्वविद्यालय की विशेष ताकत बनकर उभरी है। यह विश्वविद्यालय के बेहतर शोध कार्य, बढ़ती शैक्षणिक और शोध प्रभाव को दर्शाता है। गलगोटिया विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने कहा कि यह उपलब्धि केवल विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों की है जिन्होंने बड़े सपने देखने का साहस किया। उन अभिभावकों की है जिन्होंने उन सपनों पर विश्वास किया और हर उस भारतीय की है जो इस यात्रा पर गर्व महसूस करता है। उन्होंने कहा कि यह केवल गलगोटिया का क्षण नहीं, बल्कि भारत के आगे बढ़ने और नेतृत्व करने का समय है। गलगोटिया विश्वविद्यालय ने एक सशक्त और शोधपरक शैक्षिक वातावरण तैयार किया है। विश्वविद्यालय अब तक 31 पेटेंट प्राप्त कर चुका है, जो नवाचार और बौद्धिक संपदा निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विश्वविद्यालय की स्कोपस प्रकाशन प्रोफाइल भी उसकी शोध क्षमता को प्रमाणित करती है। विश्वविद्यालय के नाम पर 8,500 से अधिक इंडेक्स्ड शोध पत्र, 65,500 से अधिक साइटेशन तथा 94 का प्रभावशाली एच इन्डेक्स दर्ज है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय ने 15 सरकारी वित्तपोषित शोध परियोजनाएं हासिल की हैं, जिनके लिए लगभग 1.70 करोड़ रुपये की फंडिंग प्राप्त हुई है।


