द न्यूज गली, ग्रेटर नोएडा : बिसरख थाना पुलिस ने जीएसटी अधिकारी बनकर एक जीएसटी कंसल्टेंट से 29 लाख रुपये वसूलने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 24.50 लाख रुपये नकद और 4.50 लाख रुपये की सोने की चेन, चांदी का कड़ा व अंगूठी बरामद हुई है। पुलिस के मुताबिक रकम की शत-प्रतिशत बरामदगी कर ली गई है।

पुलिस ने बताया कि 20 जुलाई को जीएसटी कंसल्टेंट अपने पालतू कुत्ते और लैपटॉप के साथ कार से निकले थे। एस एस्पायर सोसाइटी के पास आरोपियों ने अपनी कार उनकी कार के आगे लगाकर उन्हें रोक लिया। इसके बाद खुद को जीएसटी अधिकारी बताते हुए आरोपी उनकी कार में बैठ गए। आरोपियों ने दो फर्मों के नाम लेकर फर्जी ई-वे बिल और सत्यापन का मामला बताया और कार्रवाई व जेल भेजने की धमकी देकर 29 लाख रुपये की मांग की।आरोपियों ने पीड़ित को उसकी ही कार में बैठाकर इधर-उधर घुमाया। बाद में उसके भाई के जरिए 29 लाख रुपये नकद मंगवाए गए। रकम मिलने के बाद आरोपी पीड़ित को उसकी कार समेत छोड़कर अपनी गाड़ी से फरार हो गए।

2021 से मुख्य आरोपी के संपर्क में था पीड़ित
पुलिस की जांच में सामने आया कि मामले का मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशू पीड़ित को पहले से जानता था। पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2021 में जीएसटी से जुड़े बिलों में कथित हेरफेर के मामले में विभाग की ओर से नोटिस जारी होने के बाद उसे निस्तारित कराने के प्रयास के दौरान दोनों के बीच संपर्क हुआ था।

पुलिस का कहना है कि आरोपियों को पीड़ित के जीएसटी संबंधी काम और उसकी कथित कमजोरियों की जानकारी थी। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने उससे मोटी रकम ऐंठने की योजना बनाई।

पुलिस की वर्दी पहना था एक आरोपी
पूछताछ में मुख्य आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वारदात के दौरान उसने पुलिस सब इंस्पेक्टर की वर्दी पहनकर पीड़ित की कार चलाई। पीड़ित को पिछली सीट पर बैठाया गया था, जबकि अन्य आरोपी उसके साथ मौजूद थे। आरोपियों ने जीएसटी मामले में जेल भेजने की धमकी देकर उसे रकम देने के लिए मजबूर किया। पीड़ित के कुत्ते को आरोपियों ने एक्सप्रेसवे पर अपने साथी को सौंप दिया था। रकम मिलने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।

कोई भी आरोपी पुलिसकर्मी नहीं
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि घटना में शामिल कोई भी आरोपी पुलिसकर्मी नहीं है। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशू यशोभूमि, द्वारका में डीसीपीओ (ड्राइवर कम पंप ऑपरेटर) के पद पर कार्यरत है। राजेश पंवार दिल्ली सिविल डिफेंस से जुड़ा है। विवेक शर्मा एस्कोर्ट, माजरा-बल्लभगढ़ में डीसीपीओ के पद पर कार्यरत रहा है। अंकित शाही लोहे की ग्रिल और गेट बनाने का काम करता है, जबकि अंशुल दिल्ली में प्रॉपर्टी का काम करता है।